
एक सफल प्रेग्नेंसी के लिए माँ के स्वस्थ अंडों और पिता के मज़बूत स्पर्म्स का आपस में मिलना आवश्यक है. लंबे समय तक लगातार कोशिश के बाद भी जब गर्भधारण नहीं हो पाता है तो फर्टिलिटी एक्सपर्ट इन दोनों में किसी संभावित समस्या का पता लगाने की कोशिश करते हैं. ऐसे में माँ के साथ ही अक्सर पिता के वीर्य का भी विश्लेषण किया जाता है जिसमें स्पर्म को कई पैरामीटर पर चेक किया जाता है और इस प्रक्रिया को सीमन एनालिसिस कहते हैं. आइये इसे डिटेल में समझते हैं.
सीमन एनालिसिस जिसे वीर्य विश्लेषण भी कहते हैं, लैब में होने वाला एक ऐसा टेस्ट है (Semen analysis test in Hindi) जिसमें पुरुष के वीर्य के सैंपल की माइक्रोस्कोप से जाँच की जाती है. सेक्स के समय निकलने वाले गाढ़े, सफ़ेद लिक्विड को सीमन या वीर्य कहते हैं. इसमें स्पर्म्स होते हैं जिनसे गर्भधारण होता है. सीमन एनालिसिस (Semen analysis in Hindi) में सीमन और स्पर्म की क्वांटिटी और क्वालिटी दोनों की जाँच की जाती है.
सीमन एनालिसिस (Semen analysis Hindi) करवाने के कई कारण हो सकते हैं; जैसे -
इनफर्टिलिटी की समस्या पुरुषों और महिला दोनों में हो सकती है लेकिन लगभग आधे मामलों में यह समस्या मेल फर्टिलिटी से जुड़ी होती है. अक्सर इसका कारण लो स्पर्म काउंट होता है और अगर आपको और आपके पार्टनर को प्रेग्नेंसी में परेशानी हो रही हो, तो डॉक्टर सबसे पहले सीमन एनालिसिस के लिए कहेंगे.
रेगुलर सीमन एनालिसिस, मेल इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट का भी एक ज़रूरी हिस्सा है. इसमें सीमन से जुड़ी डिटेल रिपोर्ट होती है; जैसे - स्पर्म काउंट, स्पर्म कंसंट्रेशन, मोटिलिटी, शेप, पी एच लेवल, फ्रुक्टोस लेवल आदि ज़रूरी जानकारियाँ.
मेल इनफर्टिलिटी के कई कारण हो सकते हैं; जैसे – फैमिली हिस्ट्री, हॉर्मोन्स इंबैलेंस, टेस्टीकल्स (testicle) की नसों में रुकावट, वेरीकोसील, लो सेक्स ड्राइव, इरेक्शन ना हो पाना, टेस्टीकल्स में दर्द, सूजन या गांठ का होना आदि. सीमन एनालिसिस इन सभी समस्याओं के इलाज से पहले किया जाता है.
वेसेक्टोमी रिवर्सल सर्जरी यानी कि वेसेक्टोमी को पलट देना जिससे स्पर्म्स सीमन में प्रवेश करने लगते हैं और इससे आपकी पार्टनर प्रेग्न्नेट हो पाती है. आमतौर पर वेसेक्टोमी रिवर्सल के कुछ हफ्तों के भीतर सीमन में स्पर्म्स दिखाई देने लगते हैं, लेकिन कभी-कभी इसमें एक साल या उससे अधिक समय भी लग सकता है. स्पर्म्स की रेगुलर जाँच के लिए डॉक्टर सीमन एनालिसिस करवाते हैं.
कैंसर रोग और इससे जुड़ा ट्रीटमेंट, मेल और फ़ीमेल फर्टिलिटी को गहराई तक प्रभावित कर सकता है. इसीलिए अक्सर कैंसर के इलाज के बाद प्रेग्नेंसी में प्रॉब्लम देखी जाती है. इससे निपटने के लिए फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन तक किया जाता है. फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन में एग्स , स्पर्म्स या रिप्रोडक्टिव टिश्यू (reproductive tissues) को प्रिजर्व करते हैं जिससे भविष्य में बच्चे पैदा करने के लिए उनका उपयोग किया जा सके. इस प्रोसेस से पहले पुरुष की शारीरिक जाँच और मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी ली जाती है और फिर सीमन तथा स्पर्म्स की जाँच के लिए सीमन एनालिसिस किया जाता है.
आइये अब जानते हैं सीमन एनालिसिस का तरीक़ा.
सीमन एनालिसिस की प्रक्रिया कई चरणों में की जाती है, जिसमें पहला स्टेप है,
सीमन एनालिसिस टेस्ट (Semen analysis test Hindi) के 2 से 5 दिन पहले से डॉक्टर आपको सेक्स या मास्टरबेट बंद करने के लिए कहेंगे. साथ ही टेस्ट के पहले हर्बल सप्लीमेंट्स या शराब का सेवन भी न करें. अब क्लिनिक में एक पर्सनल रूम में आपको मास्टरबेट करके सीमन का सैंपल एक कंटेनर में इकट्ठा करना होगा. मास्टरबेट करते हुए लुब्रीकेंट का प्रयोग न करें. कई बार डॉक्टर एक बिना लुब्रीकेंट वाला ख़ास कंडोम भी देते हैं, जिससे सेक्स के दौरान सीमन का सैंपल लिया जा सके.
अगर आप घर पर सीमन का सैंपल कलेक्ट कर रहे हैं तो इसके लिए एक साफ़ कंटेनर का प्रयोग करें और उस पर अपना नाम लिखें. अब मास्टरबेट करके कंटेनर में सैंपल जमा कर लें. इस दौरान अगर सैंपल में कपड़े का धागा या प्यूबिक हेयर गिर जाए तो उसे ऐसे ही छोड़ दें. अब कंटेनर को कस के बंद करें और सैंपल को कमरे के तापमान पर ही रखें. इसे 1 घंटे के भीतर टेस्टिंग लैब में ले जाना चाहिए.
सीमन एनालिसिस का रिजल्ट व्यक्ति की उम्र, लिंग, मेडिकल हिस्ट्री और अन्य पैरामीटर्स के आधार पर अलग-अलग हो सकता है. वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) के अनुसार, एक हेल्दी स्पर्म की नार्मल रेंज इस तरह होनी चाहिए. वॉल्यूम 1.5 मिलीलीटर (ml) से अधिक होना और pH या एसिडिटी 7.2 से 7.8 के बीच में होना चाहिए. इसके अलावा स्पर्म काउंट 39 मिलियन प्रति स्खलन, स्पर्म्स की मोटिलिटी 32% से ज़्यादा और स्पर्म्स 50-65 माइक्रोमीटर तक होना चाहिए.
सीमन एनालिसिस की रिपोर्ट (Semen test ki normal report) को कई तरह से इंटरप्रेट किया जा सकता है. सामान्यतः एक पुरुष के एक बार के स्खलन में 2 - 5 मिलीलीटर सीमन निकलता है. लेकिन अगर वॉल्यूम कम या बिल्कुल नहीं है, तो उसके कई कारण हो सकते हैं. जैसे स्खलन करने में दिक्कत होना, सैंपल का पूरी तरह कंटेनर में ना जाना, नसों में किसी तरह की रुकावट होना, टेस्ट से पहले कई बार सेक्स करना आदि. अगर स्पर्म काउंट 15 मिलियन प्रति मिलीलीटर से कम और मोटिलिटी 32 प्रतिशत से कम है तो यह स्वस्थ नहीं माना जाता है. टेस्ट में किसी भी तरह की कमी दिखने पर डॉक्टर चार से छह हफ़्ते के बाद दुबारा टेस्ट करवाने के लिए कह सकते हैं. हालाँकि लो स्पर्म काउंट का मतलब यह नहीं होता है कि व्यक्ति पूरी तरह से इनफर्टाइल है.
आमतौर पर एक पुरुष 2-5 मिलीलीटर सीमन स्खलित करता है. इसमें 65% मात्रा सेमीनल वेसिकल्स (seminal vesicles) से, 30-35% प्रोस्टेट से और केवल 5% वसा (fat) होता है. सैंपल में अगर इससे कम वॉल्यूम है तो डॉक्टर इसके कारण की जाँच करेंगे और अगर वॉल्यूम इससे ज़्यादा है तो ऐसे में स्पर्म्स की कंसंट्रेशन में कमी आ सकती है.
सीमन का एज़ोस्पर्मिक सैंपल वो होता है जिसमें कोई स्पर्म्स नहीं पाया जाता है. कम स्पर्म्स वाले सैंपल को ऑलिगोस्पर्मिक सैंपल (oligospermic sample) कहते हैं, जिसमें 20x106/ml से कम कंसंट्रेशन होता है. जबकि नॉर्मोस्पर्मिक सैंपल (normospermic sample) में 20x106/ml से अधिक कंसंट्रेशन पाया जाता है.
स्पर्म की मूव करने की क्षमता को स्पर्म मोटिलिटी कहते हैं. यह फर्टिलिटी के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्पर्म को एग्स तक पहुँचने और उसे फर्टिलाइज़ करने के लिए फीमेल रिप्रोडक्टिव ट्रैक से गुजरना होता है. मोटिलिटी दो तरह की होती है. प्रोग्रेसिव मोटिलिटी में स्पर्म्स अधिकतर सीधी रेखा या बड़े घेरे में ट्रेवल करते हैं, वहीं नॉन-प्रोग्रेसिव मोटिलिटी में स्पर्म्स सीधी रेखा में नहीं चलते और छोटे घेरे में आगे बढ़ते हैं. अगर 32 प्रतिशत से कम स्पर्म ठीक से ट्रेवल नहीं कर पाएँ तो इसे खराब स्पर्म मोटिलिटी कहा जाता है.
स्पर्म के शेप और साइज को मोरफ़ोलॉजी कहा जाता है. नॉर्मल स्पर्म का साइज़ ओवल और उसकी बाहरी संरचना चिकनी होनी चाहिए. सिर का भाग 40-70% और बीच के हिस्से तथा पूँछ में कोई असामान्यता नहीं होनी चाहिए. साथ ही स्पर्म हेड के आधे से अधिक हिस्से में कोई साइटोप्लाज्मिक वेकुलेस (cytoplasmic vacuoles) नहीं होनी चाहिए. इस तरह के दिखने वाले स्पर्म के अलावा बाक़ी सभी स्पर्म्स को नार्मल नहीं माना जाता है. 100 में से 14 स्पर्म्स ही नार्मल होते हैं और अगर यह संख्या 4% से कम हो तो फर्टिलाइज़ेशन में कमी आ जाती है.
सीमन सैंपल में मौजूद लाइव स्पर्म्स के परसेंटेज को स्पर्म वायटिलिटी कहते हैं. WHO के अनुसार, स्पर्म वायटिलिटी की हैल्दी रेंज 54% - 97% के बीच होती है.
स्पर्म्स को रीप्रोडक्टिव ट्रैक में आगे ले जाने के लिए सीमन एक कैरियर का काम करता है. नॉर्मल कंडीशन में वेजाइना का पीएच उस हिस्से में इन्फेक्शन को रोकने और बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है. वहीं सीमन का एवरेज पीएच 7.2 और 7.8 के बीच होना चाहिए जो स्पर्म्स के लिए एकदम सही वातावरण है. अगर सीमन का पीएच 7 से कम है, तो यह एसिडिक है और इससे प्रेग्नेंसी की संभावनाओं में कमी आ जाती है. इसके विपरीत, यदि सीमन का पीएच 8 से ऊपर है, तो यह एल्कलाइन है और इससे स्पर्म की मोटिलिटी ख़राब हो सकती है साथ ही इन्फेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है.
सीमन एनालिसिस टेस्ट सीमन और स्पर्म दोनों की जाँच करता है. इस टेस्ट के रिज़ल्ट को देखकर कई बार डॉक्टर अन्य फॉलो-अप टेस्ट भी कराते हैं. फर्टिलिटी और इनफर्टिलिटी के कारण पता लगाने के लिए इमेजिंग, हॉर्मोन, स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड (scrotal ultrasound), जेनेटिक टेस्ट, टेस्टिकुलर बाईओप्सी जैसे कई टेस्ट किए जाते हैं.
सीमन एनालिसिस टेस्ट की अब्नॉर्मल रिपोर्ट (Semen report analysis in Hindi) आने के कई कारण हो सकते हैं; जैसे - सीलिएक रोग (celiac disease), कुछ ख़ास दवाइयों का प्रयोग, आनुवांशिक विकार, हार्मोनल इंबैलेंस , वैरिकोसील, कैंसर का ट्रीटमेंट, रिप्रोडक्टिव ट्रैक (abnormal reproductive tract) का नार्मल न होना, रिप्रोडक्टिव ट्रैक में इन्फेक्शन, डायबीटीज (diabetes) और उतरे हुए टेस्टीकल्स. इसके अलावा पर्यावरण से जुड़े कारण, पॉलुशन, कुछ ख़ास तरह के जॉब जिनमें टॉक्सिक केमिकल्स का एक्सपोज़र हो और ख़राब लाइफस्टाइल भी लो स्पर्म काउंट कारण बन सकते हैं.
इनफर्टिलिटी के कई लक्षण होते हैं; जैसे - प्रेग्नेंसी ना हो पाना, हार्मोनल इंबैलेंस , स्खलन में दिक्कत होना, कम मात्रा में स्खलन होना, सेक्स ड्राइव में कमी, इरेक्शन ठीक से ना होना, टेस्टीकल्स में दर्द, सूजन या गाँठ, गाइनेकोमेस्टिया (gynecomastia) चेहरे या शरीर के बालों का कम होना, स्पर्म काउंट कम होना वगैरह. अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण लंबे समय तक दिखाई दे तो डॉक्टर से ज़रूर मिलना चाहिए.
मेल इनफर्टिलिटी को सामान्यतः लो कम स्पर्म काउंट या लो स्पर्म मोबिलिटी से जोड़ कर देखा जाता है और दोनों ही स्थितियों में लंबे अर्से तक कोशिश करने के बाद भी प्रेग्नेंसी में दिक्कत आती है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि एक पुरुष पिता ही नहीं बन सकता. अधिकतर मामलों में इनका इलाज संभव है और इसलिए ऐसी समस्याओं के लिए डॉक्टरी सलाह लेना ज़रूरी है.
Yes
No




Hello friends... Dr ne mujhe bola he 12 april se 15 april tak delivery ho jani chahiye baki bache ko prblm ho sakti he... Par bache ne head niche fix hi nai kra to bachedani ka muh kese khule.. apme koi he jiski sath ye prblm hui ho...!!
Hello mom's mera 6 month chsl rha h kl maine thoda wajan utha liya tha tkriban 10 kg k lgbhg to ky mere bachche ko koi problem to nhi n hogi
Hello moms meri delivery ko 4 month ho gye h mujhe feb me halki bleeding hui thi march me nahi hui fir april me start ho gaye kya ye normal h plzzz reply me
Hello sisters please meri ultrasound report dekhkar bataiye ki sab Kuch hai .... our meri pregnancy ko kitne din ho gay me bahut confused Hu ....mere hisaab se 7th month abhi start hua hai doctor ne Bola hai ki 7 month complete hone wala hai ..... please help me
Hlw mom's Mera baby rat bilkul bhi nahi sota aur din m sota h kyaa kru bhot rota h
Your body needs extra nutrition this trimester - these can help.





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