


Snoring
20 January 2026 को अपडेट किया गया
ऐसा कई बार देखने को मिलता है कि जो महिलाएं कभी खर्राटे नहीं लेती हैं वह प्रेग्नेंसी के दौरान खर्राटे लेने लगती हैं. इस दौरान एस्ट्रोजन का लेवल बढ़ जाने की वजह से कई अजीब से बदलाव दिखने लगते हैं. उन्हीं में से एक लक्षण खर्राटे लेना है. तो आइए आपको गर्भावस्था के दौरान खर्राटों के लिए जिम्मेदार कारण और उनके इलाज के बारे में बताते हैं.
प्रेग्नेंसी के दौरान वजन बढ़ना और खर्राटे शुरू होना एक-दूसरे से संबंधित है. गर्भावस्था में सामान्यतः स्त्रियों का वजन बढ़ने से उनके सिर और गर्दन के आसपास अतिरिक्त टिशू बढ़ जाते हैं और खर्राटे आने लगते हैं. गर्भवती महिलाओं की गर्दन का पोस्चर अगर सही न हो तो इस वजह से भी वह खर्राटे लेती हैं.
महिला के गर्भवती होने पर उसके शरीर में कई तरह के प्रेग्नेंसी हारर्मोंस का उतार चढाव होने लगता है जिसके कारण स्त्री की नाक के म्यूकस मेंब्रेन फूल जाते हैं. इससे नाक के अंदर कंजेशन होने लगता है जो लेटने पर बढ़ जाता है. वहीं, जब वह जाग रही होती है तो यह दिक्कत नहीं आती.
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गर्भावस्था के दौरान शरीर में ब्लड प्रेशर का स्तर बदलने की वजह से भी गर्भवती महिलायें खर्राटे लेने लगती हैं. इस दौरान रक्त की मात्रा और रक्त कोशिकाएं बढ़ जाती हैं, जिससे नाक की झिल्ली में सूजन आ जाती है और खर्राटे आने लगते हैं.
स्लीप एप्निया एक ऐसा विकार है जिसमें बार-बार सांस रुक जाती है और शुरू हो जाती है. यदि आप जोर से खर्राटे लेती हैं और पूरी रात की नींद के बाद भी थकान महसूस करती हैं, तो आपको स्लीप एप्निया भी हो सकता है. अपने पति या परिवार से इस बात को कनफर्म करें कि क्या आप नींद में हांफते हुए सांस लेती हैं और ऐसा हो रहा है तो अपने डॉक्टर से और इस बारे में बताएं.
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Written by
Parul Sachdeva
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