
कुपोषण धीरे-धीरे देश में पैर पसार चुका है. बच्चों पर इसका असर गर्भ से ही होने लगता है यानी कि प्रेग्नेंसी से ही कुपोषण की शुरुआत हो सकती है. हालाँकि, ऐसा नहीं है कि कुपोषण की समस्या सिर्फ़ बच्चों और महिलाओं को ही होती है. पुरुष भी कुपोषण का शिकार हो सकते हैं. चलिए इस आर्टिकल के ज़रिये आपको डिटेल में बताते हैं कि कुपोषण क्या होता है (kuposhan meaning), कुपोषण के लक्षण क्या होते हैं, कुपोषण किन कारणों से होता है और कुपोषण से बचाव के क्या उपाय होते हैं!
अक्सर लोगों का सवाल होता है कि कुपोषण क्या है (kuposhan kya hai) या कुपोषण किसे कहते हैं (kuposhan kise kahate hain), कुपोषित बच्चे (kuposhit bacche) कैसे होते हैं, आदि. इसका जवाब यह है कि जब किसी बच्चे या व्यक्ति के शरीर को सही मात्रा में पोषण नहीं मिलता है, तब वह कुपोषण का शिकार (kuposhan ka shikar) बन जाता है. इसका असर बच्चे या व्यक्ति की सेहत पर होता है.
कुपोषण (kuposhan ke prakar) मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है;
जब शरीर को पर्याप्त प्रोटीन, कैलोरी या माइक्रोन्यूट्रिएंट्स नहीं मिलते हैं, तब उसे अंडर न्यूट्रिशन (अल्प पोषण) कहा जाता है. ऐसी स्थिति में शरीर कमज़ोर हो जाता है और शरीर के विकास में देरी होती है; जैसे- हाइट के अनुसार कम वज़न होना, उम्र के अनुसार हाइट कम होना (स्टंटिंग) और उम्र के हिसाब से कम वज़न होना.
प्रोटीन, कैलोरी या फैट जैसे कुछ न्यूट्रिशन का अधिक सेवन भी कुपोषण का कारण बन सकता है. अति पोषण के कारण अधिक वज़न या मोटापे की समस्या होती है.
कुपोषण (Kuposhan in Hindi) के कई कारण हो सकते हैं. यहाँ हम आपको कुछ आम कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं.
कुपोषण का पहला मुख्य कारण है- डाइट पर ध्यान न देना. सही डाइट न होने के कारण बच्चे कुपोषण का शिकार बन जाते हैं. बच्चे के पोषण की शुरुआत प्रेग्नेंसी से ही हो जाती है. इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिला को न्यूट्रिशन से भरपूर डाइट फॉलो करने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा, हमारे देश में कई ऐसे ग़रीब परिवार हैं, जो अपने बच्चे को हेल्दी खाना नहीं दे पाते हैं. इसके चलते बच्चे खाना छोड़ देते हैं और इससे उनके शरीर में पोषण की कमी होने लगती है. अगर आप सक्षम है, तो अपनी डाइट के साथ बिल्कुल भी समझौता न करें.
कुछ मामलों में ऐसा भी देखा गया है कि लोग खाना तो बहुत खाते हैं, लेकिन उसमें न्यूट्रिशन की कमी होती. अधिक फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड के सेवन के कारण भी कुपोषण की समस्या होती है. बात चाहे आपकी डाइट की हो या फिर आपके बच्चे की,दोनों ही स्थितियों में आपको न्यूट्रिशन से भरपूर डाइट फॉलो करना चाहिए.
कई लोग ऐसे भी होते हैं, जिन्हें कुपोषण के बारे में जानकारी ही नहीं होती है. उन्हें पता नहीं होता है कि वे जो खा रहे हैं, वो शरीर के लिए सही है भी या नहीं.
साफ़-सफाई की कमी और हाइजीन के कारण भी कुपोषण की समस्या होती है.
कुछ बच्चे जन्म से ही (kuposhit) कमज़ोर होते हैं; जिसका कारण है कि उन्हें गर्भ में ठीक प्रकार से पोषण नहीं मिल पाता है. ऐसे बच्चों (Kuposhan child) को ख़ास ख़्याल और देखभाल की ज़रूरत होती है.
एचआईवी, एड्स, कैंसर या टीबी जैसी गंभीर बीमारियाँ भी कुपोषण का कारण बनती हैं.
ग़रीबी, बेरोजगारी या अन्य आर्थिक समस्याएँ भी कुपोषण का एक बड़ा कारण हो सकते हैं, क्योंकि इसके कारण लोग अपने लिए पोषण से भरपूर चीज़ें नहीं खऱीद पाते हैं.
जब शरीर को ज़रूरी पोषण तत्व नहीं मिलते हैं, तो कई तरह के लक्षण दिखने लगते हैं. यहाँ हम आपको (kuposhan ke lakshan) कुछ आम लक्षणों के बारे बताने जा रहे हैं, जो कुपोषण की ओर इशारा करते हैं;
कुपोषण का मुख्य लक्षण है- कमज़ोरी और थकान. जब शरीर को सही पोषक तत्व नहीं मिलते हैं तो इससे शरीर जल्दी थकने लगता है. दिनभर के नॉर्मल से कामों में भी आपको मुश्किल महसूस होने लगती है. वहीं, बच्चे खेलने के दौरान जल्दी थक जाते हैं. इतना ही नहीं, कुपोषण का असर बच्चे के विकास पर भी पड़ता है.
कम वज़न होना भी कुपोषण का एक लक्षण हो सकता है. अगर आपका या आपके बच्चे का वज़न अचानक कम हो रहा है, तो इसका मतलब यह है कि आपके शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल रहे हैं.
अगर बच्चे की हाइट धीमी गति से बढ़ रही है, तो यह भी कुपोषण की ओर इशारा करता है.
कुपोषण की स्थिति में बच्चे या व्यक्ति को कम भूख लगने लगती है. इसके कारण वज़न भी घटने लगता है.
आयरन की कमी से एनीमिया की शिकायत हो सकती है, जिसके कारण आपको थकान और कमज़ोरी महसूस हो सकती है.
कुपोषण का असर व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर भी होता है. इसके कारण दिमाग़ का विकास प्रभावित होता है.
कुपोषण का असर त्वचा पर भी दिखाई देता है. इसके कारण त्वचा में रूखापन आ जाता है. इसके साथ ही बाल झड़ने लगते हैं.
पर्याप्त पोषण न मिलने के कारण इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाता है, जिसके कारण व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ने लगता है.
कुपोषण के कारण दाँत और हड्डियों में भी कमज़ोरी आने लगती है. कुपोषण के कारण दाँत कमज़ोर हो जाते हैं और आपको हड्डियों में दर्द महसूस हो सकता है.
कुपोषण के कारण पेट की समस्याएँ बढ़ जाती हैं. आपको पेट में दर्द, क़ब्ज़ और गैस की समस्या हो सकती है.
कुपोषण के कारण महिलाओं को मासिक धर्म में अनियमितता का सामना करना पड़ सकता है. दरअसल, कुपोषण की स्थिति में वज़न तेज़ी से घटने या बढ़ने लगता है.
इन सभी लक्षणों को समझना महत्वपूर्ण है. अगर आप यह लक्षण ख़ुद में या अपने बच्चे या फिर परिवार के किसी सदस्य में देखती हैं, तो तुरंत इस बारे में डॉक्टर से बात करें.
कुपोषण एक गंभीर समस्या है, जो महिला, पुरुष और बच्चों (bacha kamjor ho to kya kare)को प्रभावित कर सकती है. कुपोषण से व्यक्ति की सेहत बिगड़ती है और उसके शारीरिक व मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है. चलिए आपको अब बताते हैं कि कैसे आप ख़ुद को और अपनों को कुपोषण (kuposhan se bachne ke upay) से बचा सकते हैं!
कुपोषण से बचने का एक उपाय यह है कि आप डाइट पर विशेष ध्यान दें. विटामिन, मिनरल, प्रोटीन और स्टार्च से भरपूर चीज़ों को डाइट में शामिल करें. आप अपनी डाइट में हरी सब्ज़ियों, फल, दाल, दूध, दही, अंडा, आलू जैसी चीज़ों को शामिल कर सकते हैं. साथ ही, जंक फूड और फास्ट फूड्स से दूर रहें, क्योंकि ये आपके शरीर के लिए नुक़सानदायक होते हैं.
कुपोषण से बचने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करें. एक्सरसाइज, मेडिटेशन, योग को अपने रूटीन में शामिल करें. वहीं, बच्चों को फिजिकल एक्टिविटी में शामिल होने के लिए प्रेरित करें.
कुपोषण के लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से परामर्श करने में बिल्कुल भी देरी न करें. लक्षणों के आधार पर डॉक्टर आपको टेस्ट करवाने के लिए कहेंगे और फिर उसके अनुसार आपका ट्रीटमेंट करेंगे.
लोगों में अभी भी कुपोषण को लेकर कम जानकारी है. हालाँकि, इसके लिए सरकार कई तरह की योजनाएं चला रही हैं. मिड-डे मिल स्कीम (Mid-day meal scheme), और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National food security act) जैसी योजनाएं कुपोषण से बचाव के लिए प्रभावी हैं.
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कुपोषण से बचने के लिए हेल्दी डाइट, लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज, और सही समय पर ट्रीटमेंट लेना महत्वपूर्ण है. कुपोषण से बचने के लिए आप अपना और अपनों का ध्यान रखें.
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