
हींग, जिसे असफेटिडा के रूप में भी जाना जाता है, अक्सर इसका इस्तेमाल हिंदुस्तानी खाना पकाने में किया जाता है। यह फेरुला नाम के पौधे की जड़ों से बनाया जाता है। यह खाने को एक खास महक और ज़ायका देता है और विशेष रूप से शाकाहारी व्यंजनों में उपयोग किया जाता है। चटनी, गरमा गरम मुरब्बे, अचार, सॉस इन सभी चीजों में हींग मिलाया जाता है।
हींग औषधीय जड़ी-बूटियों के परिवार से है, यह सेहत को कई फायदे पहुचाने के लिए जाना जाता है और इसका इस्तेमाल अक्सर सांस से जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। चूंकि यह गर्भाशय को ताकत देता है, इसलिए अगर महिलाओं को मासिक धर्म से जुड़ी कोई समस्या है तो वे इसका सेवन कर सकती हैं। इसके अलावा, यह विभिन्न प्रकार के जननांग संक्रमणों के साथ-साथ यौन संचारित रोगों (एसटीडी) के इलाज में भी मदद करता है।
सामान्य तौर पर गर्भावस्था में हींग के सेवन में कोई जोखिम नहीं है लेकिन इसका इस्तेमाल सावधानी पूर्वक करना चाहिए क्योंकि इसके कुछ साइड इफ़ेक्ट भी होते हैं ।
यदि साफ शब्दों में कहें तो गर्भवती होने पर हिंग खाना सुरक्षित नहीं है। हींग में गर्भपात करने वाले गुण होते हैं जो भ्रूण को मार सकते हैं और इसे गर्भाशय की दीवार से जुड़ने से रोक सकते हैं। हींग में मासिक धर्म शुरू करने वाले गुण होते हैं। इसलिए ज़्यादा मात्रा में हींग का सेवन करने से गर्भपात हो सकता है।
इसके साथ ही, कुछ गर्भवती माताएँ इसके प्रति ज़्यादा सेंसिटिव होती हैं या इसकी तेज़ गंध उन्हे अच्छी नहीं लगती है। ऐसे में, खाने में हींग डालने से उल्टी हो सकती है। गर्भवती होने पर हींग के सेवन से पूरी तरह परहेज़ करना ज़्यादा अच्छा होता है।
हींग और जीरा वास्तव में उन मसालों की लिस्ट में हैं जिन्हे गर्भावस्था के दौरान नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह गर्भवती मां और भ्रूण के लिए हानिकारक है।
इसमें कोई शक नहीं कि हींग एक औषधीय जड़ी-बूटी है। यह सांस से जुड़ी समस्याओं को ठीक करती है, पेट साफ होने मदद करती है और खून में कॉलेस्ट्रॉल को कम करती है। हींग मासिक धर्म का शुरू होना उत्तेजित करता है, महिलायें इसे अपने मासिक धर्म को कंट्रोल करने के लिए लेती हैं। यह जननांग संक्रमण या यौन संचारित रोगों (एस टी डी ) के इलाज में मदद करता है। इसके अलावा, इसके तेज़ तंत्रिका-उत्तेजक गुणों के कारण, कुछ लोगों को लगता है कि यह डिप्रेशन के इलाज में मददगार है।
इन्ही सब कारणों से कुछ लोगों के मन मे यह सवाल आ सकता है कि गर्भावस्था में हींग का सेवन सुरक्षित है या नहीं ? अगर गर्भवती महिलायें इसे बहुत सीमित मात्रा मे उपयोग करें तो इसके सेवन से कोई खतरा नहीं है। पेट में दर्द, पेट की ख़राबी और एसिडिटी को कम करने के लिए गर्भवती माताओं द्वारा अक्सर हींग का सेवन किया जाता है। इसके साथ ही, कुछ गर्भवती महिलाएं सिरदर्द दूर करने के लिए हींग का सेवन करती हैं क्योंकि इसमें कुमारिन नाम का पदार्थ होता है जो खून को पतला करता है।
खाने में सिर्फ़ एक चुटकी हींग डालने की सलाह दी जाती है। हाज़में से जुड़ी समस्याओं का इलाज इससे किया जा सकता है। सबसे खास बात ये है कि किसी गंभीर समस्या से बचने के लिए गर्भावस्था में हींग की सिर्फ़ एक चुटकी रोज़ाना लेने की सलाह दी जाती है ।
हिंग के सेवन से गर्भवती महिलाओं को होने वाले कई प्रतिकूल परिणामों में शामिल हैं -
हींग की गंध नापसंद करने वाली गर्भवती महिलाओं को मतली और उल्टी होना संभव है।
हींग में गर्भपात रोधी गुण होते हैं। यह भ्रूण को गर्भाशय में चिपकने से रोक सकता है, जिससे गर्भपात हो सकता है।
हींग स्तनपान/ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली माताओं के लिए नुकसानदायक है। यह स्तन के दूध को दूषित कर सकता है और यहां तक कि नवजात शिशुओं को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसमें मौजूद केमिकल बच्चों को कुछ खास बीमारियों के प्रति ज़्यादा सेंसिटिव बना सकते हैं।
जिन गर्भवती महिलाओं को हाई ब्लडप्रेशर रहता है उन्हे हींग से बचना चाहिए क्योंकि यह ब्लडप्रेशर को कम करने वाली दवाओं के साथ रिएक्शन कर सकता है।
हींग के ज्यादा सेवन से गले में इंफेक्शन, गैस, डायरिया, डकार और होठों में सूजन की समस्या हो सकती है।
गर्भावस्था के पहले तीन महीनों के दौरान हींग से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
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एक बार जब शुरू के तीन महीने पूरे हो जाते हैं, उसके बाद आप बहुत कम मात्रा में हींग का सेवन शुरू कर सकते हैं। इसका सेवन करने का सबसे सुरक्षित तरीका ये है कि इसे दाल, राजमा, या छोले जैसी डिश में केवल एक चुटकी मिलाया जाए। हींग डालकर कोई भी शाकाहारी भोजन बनाया जा सकता है। किसी भी हालत में हींग को कच्चा नहीं खाना चाहिए, क्योंकि यह बेहद जहरीला और खतरनाक होता है। किसी डिश में पकने के बाद हींग अच्छी तरह घुलमिल जाता है। गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में हर दिन हींग के व्यंजन खाने से बचना चाहिए।
गर्भावस्था के दौरान माताओं को हींग से फ़ायदा होता है क्योंकि यह उन्हे बेचैनी और सूजन में आराम पहुंचाता है। अस्थमा के मरीजों को इससे राहत मिलेगी क्योंकि इससे सांस लेने में हो रही समस्या को ठीक करती है। काली खांसी और ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों पर भी यही बात लागू होती है।
गर्भावस्था के दौरान हींग का सेवन करने से पहले कई सुरक्षा उपायों का पालन किया जाना चाहिए। बेशक यह पेट फूलने और पेट दर्द जैसी परेशानी से राहत दिलाएगा, लेकिन ज़्यादा मात्रा में इसका सेवन करने का परिणाम गर्भपात भी हो सकता है। इसलिए, हींग की ज़्यादा मात्रा गर्भवती महिलाओं के लिए बड़ी समस्या पैदा कर सकती है।
गर्भावस्था में हींग का सेवन पहले तीन महीनों के दौरान पूरी तरह से टालना चाहिए। गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में इसे बहुत ही कम मात्रा में खाया जा सकता है। सुरक्षित रहने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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