
पेरेंट्स बनने का सपना अपने साथ कई तरह की ज़िम्मेदारियाँ और चुनौतियाँ भी लाता है. बच्चे को जन्म देने के बाद जब पति-पत्नी की सेक्स लाइफ धीरे-धीरे नॉर्मल ट्रैक पर आने लगती है तो ऐसे में कई बार उन्हें यह सलाह मिलती है कि ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान प्रेग्नेंसी की संभावना बेहद कम हो जाएगी और इसलिए उन्हें बर्थ कंट्रोल के दूसरे ऑप्शन अपनाने की ज़रूरत नहीं है. लेकिन सच्चाई ये है कि पोस्ट नेटल पीरियड में भी महिलाएँ ओव्यूलेट कर सकती हैं और प्रेग्नेंसी के चांसेज बने रहते हैं जिससे कई बार अनचाहा गर्भ ठहर जाता है. इस सब से बचने के लिए ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान बर्थ कंट्रोल के ऑप्शन (birth control options while breastfeeding in Hindi) अपनाने चाहिए जिससे पेरेंट्स अपने छोटे बच्चे की देखभाल के दौरान निश्चिंत रह सकें.
बच्चे के जन्म के बाद बर्थ कंट्रोल शुरू करने का सही समय हर कपल की परिस्थितियों के अनुसार अलग -अलग हो सकता है. सामान्य तौर पर, डिलीवरी के तुरंत बाद कंडोम जैसे नॉन-हार्मोनल मेथड यूज़ करने चाहिए. अगर आप हार्मोन बेस्ड बर्थ कंट्रोल; जैसे - पिल्स या आईयूडी लेना चाहते हैं तो इसके लिए कम से कम चार से छह हफ़्ते तक इंतज़ार करें क्योंकि शरीर को सामान्य अवस्था में आने के लिए इतने समय की आवश्यकता होती है.
ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान बर्थ कंट्रोल का प्रयोग सुरक्षित है या नहीं ये पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है आप किस तरह का मेथड यूज़ कर रहे हैं. कुछ ख़ास तरह के बर्थ कंट्रोल तरीक़ों (birth control options while breastfeeding in Hindi) को ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान पूरी तरह से सेफ माना जाता है; जैसे कि प्रोजेस्टिन बेस्ड बर्थ कंट्रोल पिल्स (birth control pills while breastfeeding in Hindi) इंजेक्शन और हार्मोनल आईयूडी. ये अधिकतर मामलों में ब्रेस्ट मिल्क के स्ट्रक्चर और बच्चे की हेल्थ पर बुरा असर नहीं डालते हैं, लेकिन फिर भी इन्हें डॉक्टर की सलाह से ही शुरू करना चाहिए.
जैसा हमने ऊपर बताया ऐसे बर्थ कंट्रोल मेथड जो केवल प्रोजेस्टिन बेस्ड होते हैं उन्हें ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान सेफ माना जाता है. लेकिन ऐसे सभी तरीक़े जो हार्मोन्स के कॉम्बिनेशन से बने होते हैं और जिनमें एस्ट्रोजन भी होता है उनके सेवन से ब्रेस्ट मिल्क की सप्लाई में कमी आने का खतरा होता है. इसलिए अपने डॉक्टर से सलाह से केवल प्रोजस्टिन पर आधारित बर्थ कंट्रोल मेथड चुनें जिससे लेक्टेशन पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा.
प्रोजस्टिन ओनली बर्थ कंट्रोल मेथड जैसे मिनी पिल, डेपो प्रोवेरा इंजेक्शन और हॉर्मोनल आई यू डी का प्रयोग करें जिन्हें ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान सेफ माना जाता है.
इसके अलावा कंडोम एक ऐसा ऑप्शन है जिसके इस्तेमाल के साथ ब्रेस्ट मिल्क सप्लाई के प्रभावित होने का खतरा नहीं के बराबर होता है.
ऐसे फर्टिलिटी मेथड्स को बारे में अपनी जानकारी बढ़ाएँ जिनके सावधानीपूर्वक प्रयोग से आप अपने फर्टाइल पीरियड का सटीक अंदाज़ा लगा सकें और उस दौरान सेक्स से दूर रहकर भी प्रेग्नेंसी की संभावनाओं को काफ़ी कम किया जा सकता है.
अगर आपकी कोई अंडरलाइन हेल्थ प्रॉब्लम है तो उसके साथ किस तरह के बर्थ कंट्रोल का प्रयोग ठीक रहेगा इसकी जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें.
ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान बर्थ कंट्रोल मेथड यूज़ करना चाहिए या नहीं यह पूरी तरह से आपके फैमिली प्लानिंग और व्यक्तिगत इच्छा पर निर्भर करता है. हालाँकि, ब्रेस्टफ़ीडिंग कुछ हद तक गर्भधारण की संभावनाओं को कम कर देती है लेकिन ये कोई श्योर शॉट सॉल्यूशन नहीं है क्योंकि इस दौरान भी ओवुलेशन हो सकता है. अब अगर एक छोटे बच्चे की देखभाल के दौरान अपनी हेल्थ पर और अधिक प्रेशर न डालते हुए आप पूरी तरह से दूसरी प्रेग्नेंसी से बचना चाहती हैं तो आपको बर्थ कंट्रोल मेथड यूज़ करना ही चाहिए. क्योंकि ब्रेस्टफ़ीडिंग प्रेग्नेंसी से बचने का पक्का समाधान नहीं है.
ब्रेस्टफ़ीडिंग मॉम के लिए कई तरह के कॉन्ट्रासेप्टिव मेथड उपलब्ध हैं जिन्हें वो अपने डॉक्टर की सलाह से सुरक्षित रूप से अपना सकती हैं.
इन्हें मिनी पिल भी कहा जाता है. ये हार्मोन बेड्स गोलियां होती हैं जिन्हें ब्रेस्टफ़ीडिंग (birth control pills while breastfeeding in Hindi) कराते हुए सुरक्षित रूप से बर्थ कंट्रोल के मेथड के रूप में प्रयोग किया जा सकता है. इनसे मिल्क प्रोडक्शन पर कोई नेगेटिव असर नहीं पड़ता है. इनका पूरा लाभ लेने के लिए इन्हें हर दिन एक ही समय पर लेना चाहिए.
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कॉपर से बना हुआ आई यू डी लॉन्ग लास्टिंग होता है और एक हार्मोन फ्री तरीक़ा है. इसे डिलीवरी के कुछ समय बाद लगवाया जा सकता है और यह लगभग 10 साल तक काम करता है.
कंडोम, डायफ्राम और सर्विकल कैप भी नॉन- हार्मोनल बर्थ कंट्रोल मेथड्स हैं और ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान उपयोग के लिए सुरक्षित हैं.
ऐसे कपल्स जिन्हें फ्यूचर में और बच्चे नहीं चाहिए वो परमानेंट स्टेरेलाइज़ेशन के द्वारा ट्यूब्स को बंद करवा सकते हैं. हालाँकि, इसे भविष्य में दोबारा सामान्य नहीं किया जा सकता है इसलिए इस ऑप्शन को सोच समझ के ही अपनाना चाहिए.
एल ए एम एक ऐसा तरीक़ा है जो पूरी तरह से ब्रेस्टफ़ीडिंग पर आधारित है. इसमें बच्चे को दिन और रात के दौरान फ्रिक्वेंटली फीड कराया जाता है जिससे लगभग 6 महीने तक प्राकृतिक रूप से गर्भधारण से बचा जा सकता है.
एफ ए एम दूसरा ऐसा मेथड है जिसमें बॉडी टेम्परेचर, सर्विकल म्यूकस और दूसरे फर्टिलिटी से जुड़े सिंपटम्स को चेक करते हुए फर्टाइल पीरियड का पता लगाया जाता है. हालाँकि, ये भी एक नॉन हार्मोन बेस्ड तरीक़ा है लेकिन इस मेथड का पूरा फायदा तभी मिल सकता है जब आप इसे पूरी एक्यूरेसी के साथ फॉलो करें वरना ज़रा सी असावधानी होने पर प्रेग्नेंसी की पूरी संभावना बन सकती है.
ब्रेस्टफ़ीड कराने वाली मदर्स के लिए सबसे ज़रूरी यह है कि किसी भी बर्थ कंट्रोल मेथड को यूज़ करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें और उसके बाद ही कोई एक तरीक़ा चुनें. अपने चुनें गए मेथड से जुड़े साइड इफेक्ट्स और सावधानियों के बारे में भी उन्हें पूरी जानकारी होनी चाहिए.
1. Pearlman Shapiro M, Avila K, Levi EE. (2022). Breastfeeding and contraception counseling: a qualitative study. BMC Pregnancy Childbirth.
2. Pieh Holder KL. (2015). Contraception and Breastfeeding. Clin Obstet Gynecol.
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Hello friends... Dr ne mujhe bola he 12 april se 15 april tak delivery ho jani chahiye baki bache ko prblm ho sakti he... Par bache ne head niche fix hi nai kra to bachedani ka muh kese khule.. apme koi he jiski sath ye prblm hui ho...!!
Hello mom's mera 6 month chsl rha h kl maine thoda wajan utha liya tha tkriban 10 kg k lgbhg to ky mere bachche ko koi problem to nhi n hogi
Hello moms meri delivery ko 4 month ho gye h mujhe feb me halki bleeding hui thi march me nahi hui fir april me start ho gaye kya ye normal h plzzz reply me
Hello sisters please meri ultrasound report dekhkar bataiye ki sab Kuch hai .... our meri pregnancy ko kitne din ho gay me bahut confused Hu ....mere hisaab se 7th month abhi start hua hai doctor ne Bola hai ki 7 month complete hone wala hai ..... please help me
Hlw mom's Mera baby rat bilkul bhi nahi sota aur din m sota h kyaa kru bhot rota h
Your body needs extra nutrition this trimester - these can help.





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